यह एक बहुत ही सामयिक और गंभीर विषय है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'America First' नीति और उनके प्रस्तावित टैरिफ (Tariffs) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है।
यहाँ इस विषय पर एक विश्लेषणात्मक ब्लॉग दिया गया है:
ट्रम्प के नए टैरिफ: भारत, चीन और खुद अमेरिका पर क्या होगा असर?
दुनिया भर के अर्थशास्त्री इन दिनों एक ही शब्द पर चर्चा कर रहे हैं—टैरिफ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाने की घोषणा की है। चीन पर जहाँ 60% तक के टैरिफ की बात हो रही है, वहीं भारत समेत अन्य देशों पर भी 10% से 20% तक का यूनिवर्सल टैरिफ लग सकता है।
लेकिन सवाल यह है कि इसका असली नुकसान किसे होगा? आइए विस्तार से समझते हैं।
1. चीन पर असर: 'Trade War 2.0'
चीन ट्रम्प के निशाने पर सबसे ऊपर है।
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निर्यात में गिरावट: चीन की अर्थव्यवस्था पहले से ही रियल एस्टेट संकट से जूझ रही है। 60% टैरिफ का मतलब है कि चीनी सामान अमेरिका में बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे उनके निर्यात में भारी गिरावट आ सकती है।
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सप्लाई चेन का खिसकना: कंपनियां चीन से अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर वियतनाम या भारत जैसे देशों की ओर रुख कर सकती हैं।
2. भारत पर असर: अवसर या चुनौती?
भारत के लिए यह स्थिति 'दोधारी तलवार' जैसी है:
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चुनौती: भारत अमेरिका को आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स और रत्न-आभूषण भारी मात्रा में निर्यात करता है। अगर ट्रम्प भारत पर भी टैरिफ लगाते हैं, तो हमारे उत्पाद वहां महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों का मुनाफा कम होगा।
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अवसर (China Plus One): अगर कंपनियां चीन छोड़ती हैं, तो भारत के पास खुद को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पेश करने का मौका है। ट्रम्प के साथ पीएम मोदी के व्यक्तिगत संबंध भी व्यापारिक तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
3. क्या अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान होगा?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इन टैरिफ का सबसे बड़ा झटका खुद अमेरिकी जनता को लग सकता है:
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महंगाई (Inflation): टैरिफ वास्तव में एक टैक्स है जिसे आयातक (Importers) चुकाते हैं। अंततः, इस बढ़े हुए खर्च का बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है। रोजमर्रा की चीजें जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और कपड़े महंगे हो सकते हैं।
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जवाबी कार्रवाई (Retaliation): यदि भारत और चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों (जैसे कृषि उत्पादों या हार्ले डेविडसन) पर जवाबी टैक्स लगा दिया, तो अमेरिकी किसानों और कंपनियों को बड़ा नुकसान होगा।
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विकास दर में कमी: गोल्डमैन सैक्स जैसी संस्थाओं का अनुमान है कि बड़े पैमाने पर टैरिफ युद्ध से अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ धीमी हो सकती है।
निष्कर्ष
निश्चित रूप से, ट्रम्प के टैरिफ चीन को कमजोर करने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था इतनी जुड़ी हुई है कि इसका असर हर किसी पर पड़ेगा। भारत को अपनी नीतियों में लचीलापन लाना होगा ताकि वह इस व्यापार युद्ध में नुकसान से बचकर 'ग्लोबल सप्लाई चेन' में अपनी जगह बना सके।
जहाँ तक अमेरिका का सवाल है, यदि महंगाई बेकाबू हुई, तो यह दांव ट्रम्प के लिए राजनीतिक रूप से उल्टा भी पड़ सकता है।